library in hindi essay 500 word पुस्तकालय पर निबंध

प्रस्तावना

हैलो  दोस्तों आज हम सब library in hindi essay , और essay on school library in hindi पर निबंध लिखने के लिए सीखेंगे जो क्लास 1 से लेकर 10 तक छात्रों के लिए उपयोगी साबित होगा।

 

पुस्तकालय का महत्व (important of library essay in hindi)

ज्ञान का क्षेत्र असीम है , मनुष्य का जीवन अल्प है , बुद्धिमान चाहते हैं कि उनका समय , उनके अवकाश के क्षण , ठीक प्रकार से व्यतीत हों । अतः इनसे समाज में ज्ञान की किरणें फैलती हैं , मनुष्य का अज्ञान रूपी अन्धकार नष्ट हो जाता है । नवजीवन की कली विकसित होने लगती है ।

अतः मानव के अज्ञान रूपी अन्धकार का नाश करके उनके हृदय में ज्ञान रूपी सूर्य उदय करने के लिए पुस्तकालय का महान् योगदान है । शरीर के विकास हेतु संतुलित भोजन अपेक्षित है , उसी प्रकार मानसिक स्वास्थ्य के हेतु ज्ञान आवश्यक है । ज्ञान अर्जन का प्रमुख साधन पुस्तकालय है । विद्यालय में पढ़ने मात्र से वास्तविक ज्ञान नहीं होने पाता । किसी विषय का ज्ञान पुस्तकालय का सहारा लिये बिना नहीं प्राप्त हो सकता । बड़े – बड़े पुस्तकालयों में पाठकों के अध्ययन की पूर्ण व्यवस्था होती है , निर्धन छात्रों को पुस्तकालयों से बड़ी सहायता मिलती है ।

 

पुस्तकालय के लाभ (important of library  in hindi essay)

पुस्तकालयों के द्वारा जिन पुस्तकों का अध्ययन किया जाता है उनसे आत्मोन्नति में बड़ी सहायता मिलती है । मन का मैल , सन्देह , भ्रम दूर हो मानसिक स्वास्थ्य सुधर जाता है । महान् पुरुषों के वाक्य जीवन चरित्र तथा भाषण मानव को उन्नति के शिखर पर ले जाते हैं । प्रायः देखा जाता कि समय का जितना सदुपयोग पुस्तकों का अध्ययन करने से होता है उतना अन्य किसी साधन से नहीं ।

जिसके पास कुछ काम नहीं वे अपने समय को बुरी आदतों में कलह में , सोने में समाप्त करते हैं । परन्तु पुस्तकावलोकन से समय का सदुपयोग होता है । थोड़ा सा मासिक चन्दा देकर आप पुस्तकालय की सभी पुस्तकों के पढ़ने के अधिकारी हो सकते हैं । सुविधा के लिए पुस्तकालय में पुस्तक की सूची देखने को प्राप्त होती है , जिसके सहारे आप उन पुस्तकों तथा लेखकों के विषय में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं , जिनसे आप अपरिचित हैं अथवा विलम्ब के कारण आप उनको भूल गये हैं।

यदि आपके पास धनाभाव है , यदि आप रेडियो नहीं खरीद सकते , सिनेमा में नहीं जा सकते, अथवा विदेशों में जाकर मनोरंजन तथा आनन्द ग्रहण नहीं कर सकते तो पुस्तकालय आपको उच्च कोटि के कलाकारों की पुस्तकें प्रदान करके मनोरंजन करने में सदा सहायक सिद्ध होगा । पुस्तकालय में जाकर बैठ जाइये , आपके सामने मनोरंजन का विशाल कोष खुल पड़ेगा।

चाहे आप तुलसी के काव्य का आनन्द ग्रहण कीजिए , चाहे कालिदास की वियोगिनी शकुन्तला के साथ आँसू की दो – चार बूँदें करुणा से प्लावित होकर टपकाइये। जी चाहे जिससे बात कीजिए। यहाँ आप सूर के कृष्ण की मुरली की तान भी सुन सकते हैं और भूषण के शिवाजी की वीरों के कलेजे को दहलाने वाली वाणी भी । क्या इस प्रकार का ज्ञान कोष किसी एक स्थान पर अन्यत्र प्राप्त होना सम्भव हो सकता है ?

 

 

library in hindi essay 500 word

पुस्तकालय समाज – सुधार में भी विशेष स्थान रखता है। पुस्तकालय आलोचना के कठिन प्रहारों से समाज में फैली हुई बुराइयों को छिन्न – भिन्न कर देता है। पुस्तकें पढ़ने से मनुष्यों में ज्ञान तथा सौन्दर्य – बोध की वृद्धि होती है। श्रेष्ठ एवं उन्नत विचारों के माध्यम से ही रुचि का परिष्कार होता है एवं ज्ञान वृद्धि होती है।

 

पुस्तकालय अनेक प्रकार के होते हैं। पहले प्रकार के पुस्तकालय विद्यालयों के होते हैं , इनसे केवल छात्रों और अध्यापकों का हित होता है । दूसरे प्रकार के पुस्तकालय वे हैं जिनको अध्ययन में विशेष रुचि रखने वाले व्यक्ति बना लेते हैं । तीसरे प्रकार के पुस्तकालय वे होते हैं जो कि सर्वसाधारण के लाभ के लिए स्थापित किये जाते हैं। उनसे प्रत्येक व्यक्ति पुस्तकालय के नियमों का पालन करके तथा कुछ मासिक शुल्क देकर पूर्ण रूपेण लाभ उठा सकता है।

हम देखते हैं कि अध्ययन में रुचि लेने वाले , पुस्तकालय के खुलने के समय पर इस प्रकार से प्रफुल्लित होकर अध्ययन के लिए लालायित होने लगते हैं जिस प्रकार कि कोई अबोध बालक सामने ” COLLA रखी हुई मिठाई को लेने के लिए अधीर होने लगता है।

 

 

बड़े दुःख का विषय है कि हमारे देश में श्रेष्ठ पुस्तकालयों का नितान्त अभाव है। थोड़े – बहुत पुस्तकालय नगरों में ही दिखाई देते हैं । भोले किसानों , ग्रामीणों के लिए पुस्तकालयों की व्यवस्था अभी तक नहीं हुई है। इसलिए भारत के करोड़ों लोग अविद्या के अन्धकार में ठोकर खाकर गिर रहे हैं।

देश की सरकार एवं बड़े – बड़े दानी तथा उदार हृदय वालों का परम पावून कर्त्तव्य है कि राष्ट्र में ज्ञान की ज्योति का प्रकाश भरने के लिए अपने धन तथा समय का त्याग करें, जिससे कि अज्ञान रूपी रात्रि का विनाश हो तथा उसके स्थान पर ज्ञान का भानु उदय हो जाये।  विदेशों में पुस्तकालयों का अच्छा प्रबन्ध है।

कुछ ऐसे पुस्तकालय हैं जो अपने धर्म तथा सिद्धान्तों के प्रचार के लिए बिना मूल्य विश्व के प्रत्येक देश में पुस्तकें भेजते रहते हैं। ग्राम के लोगों को ज्ञान देने के लिए सचल पुस्तकालयों की व्यवस्था होती है। सचल पुस्तकालय गाँवों में भ्रमण करके ग्रामीणों को सुन्दर पुस्तकें प्रदान करने में विशेष योग देते हैं।

विदेशों में पुस्तकालयाध्यक्ष इतने योग्य, प्रवीण एवं अध्ययनशील होते हैं कि आप किसी भी पुस्तक को पढ़ने से पूर्व उनकी अमूल्य राय का लाभ उठा सकते हैं । हमारे देश में जो शिक्षित हैं , वह भी योग्य तथा विद्वान नहीं हैं । इसका यदि कोई कारण है तो यही है कि समाचार पत्रों तथा ज्ञान – विकास के साधनों की इतनी कमी है कि निर्धन जनता धन के अभाव में उन्हें खरीद नहीं सकती फिर भला वह अपने ज्ञान की वृद्धि कहाँ से करे ?

 

उपसंहार

प्रसत्रता की बात है कि आज हमारा देश स्वतन्त्र है। library in hindi essay  स्वाधीनता की सुनहली उषा से भारत का कण – कण आलोकित हो रहा है। अपना देश है ; अपना राज्य है। हमारी सरकार देश में शिक्षा प्रसार के लिए अनेक पुस्तकालयों की व्यवस्था कर रही है। शिक्षा की स्रोत देवी सरस्वती की उपासना के लिए दो मंदिर है एक विद्यालय एवं दूसरा पुस्तकालय।

पुस्तकालय हमारे उत्थान में बहुत ही योग देंगे, अतः आशा है कि भविष्य में भारत के भावी नागरिक पुस्तकालय के माध्यम से उत्तम संस्कारों से युक्त होकर देश की उन्नति में महत्त्वपूर्ण योग देंगे। इसी आशा तथा विश्वास पर हम सुनहरे भविष्य के सपने सँजोए हैं।

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