10 बेड पर सोने से पहले बच्चो के लिए कहानियां , Bedtime Stories for Kids in Hindi

बच्चों के लिए हिंदी में सोने से पहले सुनाने वाला कहानियां

बच्चों के लिए bedtime stories for kids in hindi सुनना एक ऐसा अनुभव होता है जो उनकी मनोदशा को शांति देने के साथ-साथ उन्हें सामान्य ज्ञान भी प्रदान करता है। हिंदी में सोने की कहानियां सुनना बच्चों के लिए खास फायदेमंद होता है क्योंकि यह उन्हें उनकी भाषा में सुनने के साथ-साथ हिंदी भाषा को भी समझने में मदद करता है। bedtime stories for kids hindi से बचो के अंदर विवेक और चेतना जागृत होता हैं। अतः आप अपने बच्चों को हिंदी में सोने की कहानियां सुनाते हैं, तो इससे उनकी भाषा और समझ क्षमता दोनों ही विकसित होगी।

यहां हम आपके बच्चों के लिए कुछ बेहतरीन हिंदी कहानियों की एक सूची प्रस्तुत कर रहे हैं, जिन्हें आप अपने बच्चों के साथ सोने से पहले सुना सकते हैं:

10 बेड पर सोने से पहले बच्चो के लिए कहानियां , bedtime stories for kids in hindi

Bedtime Stories for Kids in Hindi

बच्चों की ज़िंदगी में सपनों का महत्वपूर्ण स्थान होता है। रात के समय, जब छोटे बच्चे अपनी आंखें बंद करते हैं, तो उन्हें अद्भुत और रंगीन सपनों की दुनिया में ले जाने का एक अद्वितीय मौका होता है। नींद से पहले हिंदी में कहानियाँ सुनना बच्चों को आरामदायक महसूस कराता है और उनकी सोचने की क्षमता और रचनात्मकता को विकसित करता है।

bedtime stories for kids hindi  में आज हम सब ने क्या सीखा। ?

इस लेख में, हम आपके लिए कुछ ऐसी प्रसिद्ध हिंदी में बच्चों की नींद की कहानियों की सूची लेकर आएं हैं। इन कहानियों को सुनने से पहले आपके छोटे बच्चे खुद को एक जादूगर और सपनों के सम्राट के रूप में महसूस करेंगे।

बन्दर मामा के कहानी bedtime stories for kids in hindi

बन्दर मामा की कहानी बच्चों के लिए एक प्रसिद्ध हिंदी कहानी है। इस कहानी के मुख्य पात्र बन्दर मामा होते हैं, जो एक बहुत ही चालाक और मस्तिष्कशक्ति से युक्त बन्दर होते हैं।

एक बार की बात है, एक छोटे से गांव में बन्दर मामा रहते थे। उन्हें खुदाई का बहुत ही शौक था। एक दिन उन्होंने खेत में खुदाई करते समय एक बड़ा सा टालाब (पूल) खोदा। टालाब में पानी भरने के लिए वह नदी की ओर जा रहे थे, जब उन्होंने देखा कि एक खराब लोग उनके खेत की उपज को चुरा रहे हैं। बन्दर मामा ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन वे लोग उसे धमकी देकर भाग गए।

बन्दर मामा ने तुरंत एक योजना बनाई और वह गांव के अन्य सभी बंदरों को एकत्रित करके बात की। उन्होंने बंदरों को कहा कि हमें उन लोगों को सिखाना चाहिए जो हमारी मेहनत के नतीजे चुरा रहे हैं। बंदरों ने सहमति दी और वे सभी एक मंच पर इकट्ठा हुए।

बन्दर मामा ने एक दूसरे बंदर से कहा, “हमें उन लोगों को समझाना होगा कि हमारी मेहनत चोरी करने वाले गलत है। हमें मिलकर एक योजना बनानी चाहिए ताकि हम उन्हें सीख सकें।”

बंदरों ने सोचते हुए एक योजना तैयार की। उन्होंने सोचा कि वे एक नगर की सभी खिड़कियों पर एक नोट लगा देंगे जिसमें लिखा होगा, “हम बंदर अपनी मेहनत का पूरा फल आपको देते हैं। कृपया हमें चोरी न करें।” बंदरों ने एक रात में सभी खिड़कियों पर नोट लगा दिए।

अगले दिन जब खेत की उपज चोरी करने वाले लोग खेत में पहुंचे, तो उन्होंने खिड़कियों पर लिखे नोटों को देखा। वे बहुत हैरान हुए और देखते-देखते गांव के अन्य सभी लोग भी वहां पहुंच गए।

बन्दर मामा ने सभी को संबोधित करके कहा, “हम बंदर अपनी मेहनत से खेत को विकसित करते हैं, परन्तु ये लोग हमारे मेहनत का फायदा उठा रहे हैं। हमें सबको समझाना चाहिए कि यह गलत है और हमें साथ मिलकर इसका सामना करना चाहिए।

बंदर मामा ने आगे कहा, “हमें साथ मिलकर उन्हें शिक्षा देनी चाहिए। हमें उन्हें यह सिखाना चाहिए कि दूसरों की मेहनत को चुराना न्यायिक नहीं है। हम एक उदाहरण स्थापित करेंगे जो लोगों को सोचने पर मजबूर करेगा।”

उन्होंने सभी बंदरों को कहा, “जब उन लोगों को आप खेत में फिर से देखें, तो हम सब बंदर उन्हें अचानक एक जोरदार चीख से डरा देंगे। वे सोचेंगे कि यहां कुछ असली भूत-प्रेत हैं और हमें चोरी न करेंगे।”

बंदरों ने यह योजना अपनाई और अगले दिन जब चोरी करने वाले लोग खेत में पहुंचे, तो सभी बंदर बड़े ही भयानक ढंग से चीखने लगे। लोग बहुत घबराए और धीरे-धीरे वहां से भाग निकले।

चोरी करने वाले लोग गांव में जबरदस्ती पहुंचे, तो वे खेत में किसी भूत-प्रेत के सामने खड़े हुए बंदरों को देखकर भीड़ से डर गए। यह नजर आते ही वे चोरी करने की सोच छोड़कर वहां से भाग निकले।

 

बंदर मामा और उनके साथी बंदर देखकर हंस पड़े। वे सब मिलकर खेत में जा के खुदाई करने लगे। उन्होंने साथ मिलकर मेहनत करते हुए खेत को और अच्छा बनाया और फल-सब्जियों की खेती में माहिर हुए।

बन्दर मामा की चालाकी, समर्पण और एकता ने लोगों के दिलों में संजीवनी भर दी। वे सब अब मिलकर अपनी मेहनत और संघर्ष के माध्यम से अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने की प्रेरणा लेते थे।

 

बन्दर मां के कहानी से हसमे क्या शिक्षा मिला? 

इस कहानी से हमें यह सबक मिलता है कि एकता और सामरिक बन्धुत्व किसी भी कठिनाई को पार करने में मदद कर सकते हैं। इसके साथ ही, मेहनत और चतुराई के साथ हम अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं और समाज में न्याय की स्थापना कर सकते हैं।

bedtime stories for kids hindi के यह था बन्दर मामा की कहानी, जो हमें एकता, मेहनत, और सामरिक बन्धुत्व के महत्व को सिखाती है। यह कहानी बच्चों को मनोरंजन के साथ-साथ सबक देती है और उन्हें समाज के मूल्यों को समझने में मदद करती है।

मामा के घर bedtime stories for kids in hindi

Bedtime Stories for Kids in Hindi
मामा के घर एक छोटे से गांव में, जहाँ सूखे नदियों के किनारे थे, वहाँ एक बड़े से बड़ा मकान था, जिसे सब मामा के घर के नाम से जानते थे।

मामा का घर एक तल वाला था, जिसमें कई कमरे थे। घर के बाहर एक छोटी सी बागिचा थी, जिसमें फल और सब्जियां उगाई जाती थीं। घर के पास एक छोटा सा गोशाला भी था, जहाँ गायें और बैल रहते थे।

मामा का घर सबसे बड़ा था और सभी लोग उसे बहुत पसंद करते थे। घर के अंदर एक छोटी सी पुस्तकालय भी था, जिसमें बहुत सारी पुस्तकें थीं। मामा बहुत विद्वान थे और उन्हें पढ़ने का बहुत शौक था।

घर के अंदर एक छोटा सा मंदिर भी था, जिसमें मामा रोज़ पूजा करते थे। घर के बाहर एक छोटा सा चूल्हा भी था, जिसमें मामा रोज़ाना अपना भोजन बनाते थे।

मामा का घर हमेशा खुशबूदार और सुखद रहता था, जिसकी वजह से सब लोग उसे बहुत पसंद करते थे। वहाँ की शांति और सुख-चैन से भरी हुई वातावरण को देखकर हर कोई वहां की शांति और सुख-चैन से भरी हुई वातावरण को देखकर हर कोई खुश हो जाता था। मामा के घर में सदैव परिवार का एकीकरण और आदर्शों की एकता महसूस होती थी। सभी परिवार के सदस्य मिलकर खुशी से रहते थे और एक-दूसरे के साथ प्यार और सम्मान से बर्ताव करते थे।

मामा के घर में आने वाले मेहमानों का स्वागत बहुत उत्साह से किया जाता था। घर की ध्वनि में अक्सर हंसी, बालगीत और गुफ्तगू ध्वनित होती थी। सभी लोग एक दूसरे की सुनते और समय बिताने के लिए आपस में मिलते थे।

मामा का घर गांव के अन्य लोगों के लिए एक सांस्कृतिक केंद्र भी था। यहाँ बाल-मंच नाटक, संगीत कार्यक्रम और भजन-कीर्तन का आयोजन किया जाता था। इसके साथ ही, मामा अक्सर गांव के बच्चों को पढ़ाई-लिखाई का उपदेश देते थे और उनकी शिक्षा की देखभाल करते थे।

बंदर मामा के घर की एक खासियत यह थी कि वहाँ के सभी लोग अपनी समस्याओं को साझा करते थे और आपस में सहायता करते। घर की वातावरण में सम्मान, समर्पण और प्रेम भरा होता था। जब किसी को समस्या होती तो वे सभी मिलकर उसका समाधान ढूंढ़ते थे।

घर में सभी लोग मिल-जुलकर खुशियों और दुःखों का सामना करते थे। यदि किसी व्यक्ति को दुःख पहुंचता था, तो सब उसे सामरिक भावना देकर संबंधित मदद करते थे। इस तरह, मामा के घर में एक बंधुत्व और समर्पण की भावना हमेशा महसूस होती थी।

घर के आस-पास के संसार से दूरी रखने के बावजूद, मामा का घर एक आत्मनिर्भर और खुशहाल परिवार का प्रतीक था। सभी सदस्य समय के साथ अपने क्षेत्र में मेहनत करके अपने अपने कार्यों में पूर्णता दिखाते थे। यह उनके आपसी सहयोग, संघर्ष और समृद्धि के लिए एक मार्गदर्शक उदाहरण था।

मामा के घर की कहानी हमें यह सिखाती है कि वास्तविक सुख और समृद्धि परिवार के एकात्मता, वास्तविक सुख और समृद्धि परिवार के एकात्मता, सहयोग और प्रेम से ही संभव होती है। मामा के घर की महिमा उसके लोगों के आदर्शों, संघठनशीलता और आपसी सम्बंधों में छिपी हुई थी।

मामा के घर में न सिर्फ खुशहाली बल्कि सद्गुणों और शिक्षाओं का भंडार था। घर के बच्चों को सदैव अध्ययन के महत्व को समझाया जाता था। वे सब एक दूसरे की मदद करते और संघटित ढंग से अपने सपनों की पुर्ति के लिए कड़ी मेहनत करते थे।

मामा के घर के चारों ओर हर समय चंदन की खुशबू फैली रहती थी और घर की दीपावली के दिन उसकी रौशनी से यहाँ के लोग आदर्शों और प्रकाश के प्रतीक बन जाते थे।

मामा के घर में रोज़ एक साथ बनी खाने की खुशबू फैलती थी और सभी लोग एकता के रंग में रंग जाते थे। यहाँ की महिलाएं और पुरुष एक साथ काम करते और अपने अपने दायित्वों को पूरा करते थे। इस प्रकार, मामा के घर में लोग सहयोग, समर्पण और आपसी संबंधों का आदर्श

Bedtime stories In Hindi Panchtantra
प्यारा तोता के कहानी bedtime stories for kids in hindi
Bedtime Stories for Kids in Hindi

एक समय की बात है, एक छोटे से गांव में एक प्यारा तोता रहता था। यह तोता बहुत ही सुंदर और रंगीन था। उसकी पंखों पर हरे और नीले रंग की चमक थी और उसकी आवाज़ में मिठास भरी थी। लोग उसे देखकर बहुत प्यार करते थे और उसकी खूबसूरती का आदर्श बनाते थे।

वह तोता एक खुशहाल जीवन बिताता था। उसके पास एक खूबसूरत बंगला था, जिसे वह अपना घर मानता था। वह खेतों में घूमता, फलों को चबाता और पेड़ों पर उड़ने का आनंद लेता। उसकी खुशियों का सबसे बड़ा कारण था उसके दोस्तों की कंपनी।

उसके दोस्तों में से एक था एक बाघ। वे दोनों हमेशा एक साथ खेलते, घूमते और मिलकर मस्ती करते थे। तोता बाघ के साथ अपनी खुशी का आनंद लेता और दोस्ती की मिसाल देता। दूसरे जानवर भी उसकी दोस्ती से प्यार करते थे और उसे अपना सच्चा दोस्त मानते थे।

एक दिन, तोता के पास एक बुजुर्ग आदमी आया। वह आदमी बहुत ही दुखी और उदास लग रहा था। तोता ने उसे देखा और उसके पास गया। वह उसे पूछा, “आप इतने उदास क्यों हैं? क्या मैं आपकी कुछ मदद कर सकता हूँ?”

बुजुर्ग आदमी ने धीरे से कहा, “मेरा प्यारा पेड़ जिस पर मैं जिंदगी भर बिताया है, वह मुझे छोड़कर चला गया है। मैं उसकी याद में बहुत दुखी हूँ।”

तोता ने उसकी तकलीफ समझी और उसे संबोधित करते हुए कहा, “आप मत दुखिए, मैं आपकी मदद करूंगा। आप मुझे बताइए, वह पेड़ कैसा था? शायद हम मिलकर उसे ढूंढ़ सकें।”

बुजुर्ग आदमी की आँखों में आशा की किरण देखकर बढ़ा हौसला हुआ। उसने तोता को विस्तार से बताया कि पेड़ कितना बड़ा, घना और सुंदर था। उसकी पत्नी और बच्चे भी उस पेड़ के नीचे खेलते थे और सबको उसकी खाली-खाली जड़ों पर गुमान था।

तोता ने बुजुर्ग आदमी का हाथ पकड़ा और सभी जानवरों को संगठित करने में मदद की। उसने दूसरे पक्षियों को बुलाया और सबको उस पेड़ के आस-पास ले गया। सब ने मिलकर एक बड़ी खोज शुरू की और आकर्षक फलों वाले पेड़ की तलाश में निकले। उन्होंने अपनी पंखों से ऊँचे-नीचे उड़ाई और पेड़ की ऊँचाईयों पर जांच की।

यद्यपि खोज करते करते थोड़ा वक्त लगा, लेकिन अंततः तोता ने पेड़ को ढूंढ़ लिया। उसे बहुत खुशी हुई और उसने बुजुर्ग आदमी को उस खुशखबरी के साथ वापस बुलाया। बुजुर्ग आदमी ने उसे देखते ही खुशी के आंसू बहाए और उसे गले लगाकर धन्यवाद दिया।

प्यारा तोता और बुजुर्ग आदमी ने साथ मिलकर पेड़ की पुनर्स्थापना की। वे उसे संभालकर उगाने, पानी देने और सुरक्षा करने का संकल्प लिया। उनकी मेहनत और समर्पण के बाद, पेड़ फिर से हरी-भरी हो गया और उसकी जड़ें और डालें मजबूती से बढ़ीं।

प्यारा तोता के कहानी से हमें क्या शिक्षा मिला?

इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि हमेशा दूसरों की मदद करने का अवसर ढूंढ़ें। प्यारा तोता ने अपनी मित्रता, सामर्थ्य और उदारता के माध्यम से एक बुजुर्ग आदमी की मदद की। उसने अपनी सारी संगठनशीलता और सामर्थ्य का उपयोग करके पेड़ को वापस जीवित किया। इस प्रक्रिया में वे एक दूसरे के साथ गहरी दोस्ती और सहयोग दिखाएं।

यह कहानी हमें बताती है कि हमारे पास एक छोटा सा प्रभाव भी दूसरों के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकता है। तोता ने अपनी निःस्वार्थता, संवेदनशीलता और प्रेम की मिसाल पेश की और हमें याद दिलाया कि हमें एक-दूसरे का साथ देने का बड़ा महत्व है।

इस कहानी का संदेश है कि सच्ची मित्रता और सहयोग हमारे जीवन में रंग भर सकते हैं और हमें खुशहाल बना सकते हैं। हमेशा दूसरों की दुखी हालात में मदद करने का प्रयास करें और साथ मिलकर बड़ी से बड़ी समस्याओं को हल करने का प्रयास करें। इस तरह हम एक सामरिक, प्यारभरा समाज बना सकते हैं जहां हम सभी एक-दूसरे का सम्मान करते हैं और खुशी का अनुभव करते हैं।

बूढी दादी की कहानी Bedtime stories for kids in hindi
Bedtime Stories for Kids in Hindi

बहुत समय पहले की बात है, एक छोटे से गांव में एक बूढ़ी दादी रहती थी। वह बहुत ही धैर्यशील और समझदार थी। उसके चेहरे पर वर्षों की चिंता और अनुभवों का सबकुछ छापा हुआ था। उसकी आंखों में ज्ञान की झलक और धर्मग्रंथों की गहराई थी। वह एक अज्ञात महापुरुष की तरह देखी जाती थी।

दादी अपने गांव में एक अत्यंत प्रमुख व्यक्ति की मान्यता रखती थी। उसकी बातों में सत्यता और न्याय की महानता स्थापित थी। उसका आदर्श था अपने कर्तव्यों को निरंतर निभाना और समाज के लिए सेवा करना। यही कारण था कि लोग उसकी सलाह और बुद्धिमत्ता का आदर करते थे।

एक बार, गांव में एक विवाद उठा। दो पक्षों के बीच बहुत बड़ी असमंजस मच गई। लोग एक-दूसरे के साथ तकरार कर रहे थे और मुद्दे के बारे में आमने-सामने नहीं हो पा रहे थे। सभी को यहां-वहां देखने के बावजूद, कोई भी समाधान नहीं निकला।

इस उथल-पुथल में, बूढ़ी दादी ने वह विवाद देखा और समय आने पर अपने आपको समर्पित करके उनकी मदद करने का निर्णय लिया। उसने लोगों को अपने चारों ओर इकट्ठा किया और सभी को एक साथ बुलाया। दादी ने शांति और समझदारी की वाणी से सभी को समय दिया और उन्हें आपस में बातचीत करने का आदेश दिया।

लोग दादी के आदेश को मानते हुए एकत्रित हुए और अपने-अपने विचारों और दृष्टिकोणों को साझा करने लगे। दादी ने सभी की बातें ध्यान से सुनी और माध्यम बनकर दोनों पक्षों के बीच समझौते की कोशिश की। वह न्यायसंगत और उचित समाधान निकालने के लिए सभी के मतभेदों को समझने का प्रयास किया।

दादी की विचारधारा और समाधानकारी दृष्टिकोण ने सभी को प्रभावित किया। उनकी मार्गदर्शन में लोगों की मनोभावना बदल गई और समझौता की दिशा में कदम बढ़ाने के लिए तत्पर हो गए।

सबके मिलकर काम करने के बाद, बूढ़ी दादी ने सभी को आपसी समझौते पर एकत्रित किया और संगठन करके विवाद को समाप्त किया। लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाया और आपस में मित्रता का प्रदर्शन किया। बूढ़ी दादी ने उन्हें धन्यवाद दिया और उनकी बहादुरी, सहनशीलता और विचारशीलता की सराहना की। वह उन्हें समाज के मध्य एक आदर्श माना गया, जो संघर्षों के बीच एकता और समझौते का प्रतीक थी।

बूढ़ी दादी की कहानी हमें सिखाती है कि हमें विवादों को समाधान करने के लिए उन्हें बढ़ावा देना चाहिए, बुद्धिमानी और संवेदनशीलता का उपयोग करना चाहिए। बूढ़ी दादी ने दिखाया कि उम्र के साथ आने वाला अनुभव और ज्ञान महत्वपूर्ण हो सकते हैं और हमें समाधान की दिशा में मार्गदर्शन कर सकते हैं।

यह कहानी हमें यह भी याद दिलाती है कि मानवीय संबंधों का महत्व हमारे समाज में अवित्त करता है। हमें एक-दूसरे का सम्मान करना चाहिए और एकता, समझौता और मित्रता की संस्कृति को बढ़ावा देना चाहिए। हम सभी मिलकर एक समरस और खुशहाल समाज का निर्माण कर सकते हैं।aur हमें करना भी चाहिये।

 

चलाक मछली की कहानी bedtime stories for kids in hindi

Bedtime Stories for Kids in Hindi

बहुत समय पहले की बात है, एक सुंदर झील में एक बहुत ही चतुर मछली रहती थी। इस मछली का नाम था मित्राक्षी। वह अपनी चालबाजी और मकर संग्रहण के लिए जानी जाती थी। उसकी हरकतें इतनी तेज और कुशल थीं कि दूसरी मछलियों को उसे समझने में मुश्किल होती थी।

झील में और मछलियों में एक प्रतिस्पर्धा चल रही थी। सभी मछलियां अपनी ताकत और दक्षता दिखा रही थीं और उन्हें अपने व्यापार की सुरक्षा का ध्यान रखना था। इस उथल-पुथल में, मित्राक्षी ने अपनी चालबाजी और चतुराई का प्रदर्शन किया।

वह चालबाजी से भरी हुई झील में अच्छी तरह से छिपकर घूमती और धर्मप्राण मछलियों के पास जाती और उनसे अनुकरण करती। वह उन्हें पीछे छोड़ देती और फिर से आगे निकलती, जिससे मछलियाँ उसे पकड़ने की कोशिश करतीं, पर मित्राक्षी हर बार उन्हें धूल चटाने में सफल हो जाती।

जीवन के अनुभवों से अनुकूल, मित्राक्षी ने देखा कि दूसरों के साथ समझौता करने के बजाय वह चालबाजी करके आगे बढ़ने का निर्णय लिया। उसने सोचा कि वह अपनी चालबाजी और चतुराई को अच्छे कामों में उपयोग कर सकती है।

एक दिन, झील में एक तेज हवा आई और सारी मछलियां उसके जोर के कारण अपना संतुलन खो दी। वे इधर-उधर उछालने और भटकने लगीं। मछलियां आपस में टकराने लगीं और कई बार आपस में टकराने से उनकी संघर्षशीलता बढ़ गई।

इस दुर्घटना के दौरान, मित्राक्षी ने बहुत ध्यान से देखा कि झील में फंसी हुई एक मछली है, जो ताकत-शक्ति से अशक्त हो गई है। वह मछली आंसू बहा रही थी, आशा और मदद की उम्मीद में।

मित्राक्षी ने उस मछली के पास जाकर उसे आराम दिया और सहानुभूति व्यक्त की। उसने उसे बताया कि उसका जीवन निराशाजनक नहीं है और उसे मदद करने के लिए उसका अद्यतनित कौशल और चालबाजी का उपयोग कर सकती है।

मित्राक्षी ने उस मछली को समझाया कि वह अपने विशेष गुणों का उपयोग करके पहले से अधिक सक्रिय रह सकती है। वह उस मछली को बढ़ावा देकर उसे संगठित तरीके से झील के चारों ओर तैरने में मदद करने का प्रस्ताव रखी। उसने उस मछली के आत्मविश्वास को बढ़ाने के लिए उसे साथ ले जाने की प्रेरणा दी।

मित्राक्षी ने सभी मछलियों को मिलकर समझाया कि यह समय है एक-दूसरे का सहारा बनाने का और एक दूसरे की मदद करने का। वे सभी मिलकर उस मछली की मदद करने के लिए तत्पर रहे और एक साथ काम किया।

मित्राक्षी ने सभी को संगठित किया और एक नेतृत्व भूमिका निभाई। वह सभी को इंगित करती, मार्गदर्शन करती और आगे बढ़ाती रही। धीरे-धीरे, वे सभी मिलकर उस मछली को संघर्ष से बाहर निकालकर जीवन की ऊंचाइयों की ओर पहुंचा दिया।

बड़े समय बाद, वह मछली खुद में विश्वास प्राप्त करती हुई उच्चतम उच्चायों को छूने में सफल हुई। उसने चालबाजी का सही उपयोग किया और अपनी क्षमता का विकास किया। सभी मछलियां उसे प्रशंसा करती थी।

तेज हवा और झील के तैरने वाले पर्यावरण में उच्च स्थान पर पहुंचे जाने पर, मित्राक्षी ने अपने साथी मछलियों को धन्यवाद दिया। उसने उन्हें बताया कि यह सब उसकी चालबाजी और चतुराई का परिणाम है जो उसने अपने जीवन में सीखा है। वह सभी मछलियों की आदर्श बन गई, जो सामरिकता, सहयोग और सामंजस्य को प्रशंसा करती हैं।

मित्राक्षी की कहानी हमें यह बताती है कि समय और परिस्थितियों के अनुरूप अपने दम पर आगे बढ़ना और सहायता करना आवश्यक है। इसके साथ ही, यह दिखाती है कि हमारी चतुराई, नेतृत्व क्षमता और अनुभव हमें उन परिस्थितियों में सफलता की ओर ले जा सकते हैं जब अन्य लोग अशक्त हो रहे हों।

इस कहानी से हमें यह सिख मिलती है कि हमें अपनी बुद्धिमानी और चालबाजी का उपयोग करके समस्याओं का सामना करना चाहिए। हमें अपनी क्षमताओं का पूरा उपयोग करना चाहिए और अपने आप को एक चलाक मछली के रूप में देखना चाहिए जो जीवन की लहरों को पार कर सके भले कितना भी मुस्की ही क्यों न हो।

अन्न का अपमान की कहानी bedtime stories for kids in hindi

एक गांव में एक गरीब किसान अपने छोटे से खेत में मेहनत करके अन्न उत्पादन करता था। उसकी परिश्रम और खेती का परिणाम था कि उसके पास हमेशा प्रकृति की देखभाल के साथ पर्याप्त मात्रा में अनाज होता था।

एक दिन, उसे गांव के अमीर और सत्ता प्रिय व्यापारी ने देख लिया। यह व्यापारी अन्न व्यापार में माहिर था और उसे स्वार्थपरता और धन कमाने का भारी जुनून था। व्यापारी ने किसान की अनाज की गुणवत्ता देखी और सोचा कि वह इसे सस्ते दामों पर खरीदकर बड़ा मुनाफा कमा सकता है।

व्यापारी ने किसान के पास जाकर कहा, “यह अनाज बहुत अच्छी गुणवत्ता का है। मैं तुमसे इसे आधे दाम पर खरीदना चाहता हूँ।”

किसान ने हर्षित होते हुए कहा, “धन्यवाद, सर! मैं यहां इसलिए काम करता हूँ कि मेरे परिश्रम का मूल्य मिले। मैं आपके लिए इसे आधे दाम पर बेच रहा हूँ।”

व्यापारी ने जबरदस्ती की और कहा, “तुम किसान हो, तुम्हें व्यापार की जानकारी नहीं होती। मैं इस किसान की आंखों में ग़ुस्से की आग उठी, लेकिन उसने अपनी शांति बनाए रखते हुए कहा, “सर, मैं एक गरीब किसान हूँ, लेकिन मेरी मेहनत से पैदा हुआ अनाज मेरे और मेरे परिवार के लिए मान्यता का प्रतीक है। मैं निष्पक्षता और इंसानियत के साथ अनाज बेचता हूँ, न कि अधिक लाभ के लिए।”

व्यापारी ने मुस्कान के साथ कहा, “अच्छा बोला, लेकिन यह व्यापार का नियम है। तुम्हें अपना दाम तो कम करना ही होगा।”

किसान ने व्यापारी की ओर देखते हुए कहा, “सर, मेरी मेहनत का मूल्य और मेरा अनाज की गुणवत्ता का मूल्य मैं नहीं गिरा सकता। मैं व्यापार का ज्ञान नहीं रखता, लेकिन एक चीज समझ गया हूँ कि मेरे लिए अनाज एक आदर्श है, जिसे कम दाम पर बेचने की जगह अच्छी गुणवत्ता के साथ बेचना ज्यादा महत्वपूर्ण है।”

व्यापारी थोड़ी देर के लिए स्तब्ध हो गया और फिर बोला, “ठीक है, मैं तुमसे अनाज आधे दाम पर खरीद लूंगा।”

खुशी से भरी हुई मुस्क किसान की आँखों में खुशी सी खिल उठी। वह जानता था कि अपनी मेहनत और ईमानदारी से वह अपने अनाज को सच्ची मूल्य दे रहा है। व्यापारी ने अनाज को खरीदने के बाद खुद को गर्व महसूस किया, लेकिन उसे कुछ अलग एहसास भी हुआ।

धीरे-धीरे व्यापारी ने किसान के साथ बातचीत की और उसके अनाज की गुणवत्ता और महत्व को समझने लगा। वह यह भी समझ गया कि उचित मूल्य पर अच्छी गुणवत्ता का अनाज खरीदने से उसका व्यापार भी उन्नति कर सकता है।

व्यापारी ने उस किसान को सम्मानित किया और उसे अनाज खरीदने के लिए वापस आमंत्रित किया। वह समझ गया कि किसान की मेहनत और ईमानदारी का सम्मान करना उसके व्यापार को सफलता की और ले जाएगा।

यह घटना लोगों को यह सिखाती है कि अन्न एक महत्वपूर्ण संसाधन है और उसका अपमान करना समाज के न्याय से खिलवाड़ है। गरीबी में जीने वाले लोग, जैसे कि किसान, मेहनत से अन्न की उत्पादन करते हैं और हमारे जीवन को सं

युक्त रखते हैं। उनकी मेहनत और संघर्ष ही हमारे भोजन की गारंटी होती है। लेकिन अक्सर यह देखा जाता है कि ऐसे गरीब किसानों और मजदूरों के अनाज की गिरावट और उनके अपमान का सामर्थ्य उनके हाथों से छीन लिया जाता है।

 

इस कहानी से हमें क्या शिक्षा मिला ?

Bedtime stories for kids in hindi इस कहानी से हमें यह सिख मिलती है कि हमें अन्न की महत्वता को समझना चाहिए और उसे सम्मान देना चाहिए। हमें गरीब किसानों और मजदूरों के मेहनती परिश्रम की मूल्या देनी चाहिए और उनके साथ न्यायपूर्वक व्यवहार करना चाहिए। अपने खाद्यान्न के उत्पादन में हमेशा इनके सहयोग का ध्यान रखना चाहिए ताकि हम समृद्धि की नींव को मजबूत कर सकें और समरसता से समाज का विकास कर सकें।

सांप और नेवला के कहानी bedtime stories for kids in hindi

एक जंगल में एक सांप और एक नेवला अपने आप में बहुत ही खुशहाल जीवन बिता रहे थे। वे दोनों बहुत अच्छे दोस्त थे और हमेशा एक-दूसरे के साथ खेलते, उड़ते और बातचीत करते थे। उनकी दोस्ती का उदाहरण उनके आस-पास के जीवों के लिए एक प्रेरणास्रोत बन गया था।

एक दिन, नेवला बहुत उत्साहित होकर सांप के पास आया और कहा, “मेरे दोस्त, मैंने एक आद्यात्मिक ग्रंथ पढ़ा है जिसमें लिखा है कि एक पवित्र झरने में एक मनोहारी मोर बसता है। हमें वहां जाकर उसे देखना चाहिए। क्या तुम मुझे उस झरने ले जा सकते हो?”

सांप उत्सुकता से उत्तर देते हुए कहा, “अवश्य, मेरे प्रिय दोस्त, हम तुरंत निकलेंगे।”

दोस्तों ने साथ में यात्रा की और वे जंगल के गहरी जड़ों में चलने लगे। रास्ते में नेवला ने कुछ स्नान करने के लिए छोटे से तालाब में धारण किया। उसने सांप से कहा, “दोस्त, मैं इस तालाब में थोड़ी देर के लिए रहूंगा।

सांप ने एक समझौता किया और कहा, “ठीक है, तुम यहां रुको। मैं जाकर वापस आता हूँ।”

नेवला तालाब में स्नान करते हुए अपनी खुशी का आनंद लेने लगा। बाद में जब वह बाहर निकला, तो उसे देखा कि सांप आराम से वहीं खड़ा होकर इंतजार कर रहा है।

नेवला चकित हो गया और पूछा, “दोस्त, तुमने जाने की जगह रुक क्यों गए?”

सांप ने मुस्कराते हुए जवाब दिया, “मैंने सोचा कि जब तक तुम मेरे साथ हो, मुझे तुम्हारे बिना आगे नहीं बढ़ना चाहिए। हम दोनों इस सफर को साथ में कर रहे हैं, तो मैं अपने दोस्त को इंतजार करने के लिए यहीं रहूंगा।”

नेवला को अपने दोस्त की ईमानदारी और प्यार ने गहरी चोट पहुंचाई। वह सामझ गया कि सच्ची मित्रता का अर्थ आपसी सहयोग, समर्पण और साथीपना है। यह एक आपसी विश्वास का प्रतीक है जो दोस्तों को हर मुश्किल समय में साथ खड़ा करता है।

एक दिन, जब सांप और नेवला फिर से अपनी यात्रा पर निकले, उन्हें एक जहरीला सांप देखा। यह सांप अस्तित्व में खतरनाक था और जंगल के अन्य जानवरों के लिए खतरा बन रहा था।

नेवला डर के मारे तालाब के पास छिप गया, लेकिन सांप अगर उसे छोड़कर जा रहा होता तो सबको खतरा होता। इसलिए, वह अपनी मित्रता के प्रति वफादार रहते हुए तालाब के किनारे पहुंचा और सांप के साथ लड़ने के लिए तैयार हुआ।

बहुत ही भयंकर युद्ध हुआ, जिसमें नेवला ने जहरीले सांप को नया तरीके से हराया। इस लड़ाई के बाद, सांप वापस अपने बिल में चला गया और जंगल के अन्य जानवर आराम से अपनी ज़िन्दगी जीने लगे।

नेवला और सांप की यह वीरता की कहानी जंगल के सभी जीवों के लिए प्रेरणास्त्रोत बन गई। उनका साथीपना, सामर्थ्य और धैर्य दूसरों को भी प्रभावित करने के लिए काफी था। इस कहानी से हमें यह सिख मिलती है कि सच्चे मित्र का साथ दूसरों के संकट में होना असली मित्रता का पहचान होता हैं।

Conclusion

bedtime stories for kids hindi की कहानी का मुख्य मकसद यह हैं की इस कहानी से बच्चो का मोरल ज्ञान का विकाश होता हैं था उनका बौद्धिक सकती भी बढ़ता हैं। 

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