ग्राम पंचायत पर निबंध, कैसे लिखे 500 word essay on gram panchayat in hindi

हैलो दोस्तों आज हम सब ग्राम पंचायत पर निबंध essay on gram panchayat in hindi के बारे में इस पोस्ट के माध्यम से जानकारी लेंगे। दोस्तों पंचायतों की प्रथा भारतवर्ष में अत्यन्त प्राचीन है। इसके अनुसार ग्रामीण जनता शासन का संचालन करने के लिए योग्य और विश्वासपात्र सदस्यों को चुनती हैं। इन सदस्यों की समिति ही ग्राम पंचायत कहलाती है तथा इस प्रकार की शासन पद्धति को ही पंचायत राज्य के नाम से पुकारते हैं। इस प्रणाली का इतिहास अत्यन्त गौरवमय है, जो सहस्रों वर्ष पुराना है।

प्राचीन काल में पंचायतों ने जिस कुशलता और न्यायप्रियता का परिचय दिया, उसके लिए वे आज भी सम्मान की दृष्टि से देखी जाती हैं। न्याय कार्य में अनुभवी और न्यायप्रिय योग्य व्यक्तियों को’ पंच परमेश्वर‘ की उपाधि से विभूषित किया जाता है। इस शासन प्रणाली का प्रारम्भ वैदिक काल से होता है। उपनिषद् काल, रामायणमहाभारत काल तथा बौद्ध काल में पंचायतों का कार्य अपनी चरम सीमा पर पहुँच गया था।

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अंग्रेजों के शासन काल में भी यहाँ पर पंचायतें बनीं, किन्तु के अधिकार बहुत ही सीमित थे। पंच सरकार द्वारा चुने जाते थे, अतः वे जनता के सच्चे प्रतिनिधि नहीं होते थे। इस प्रकार हम देखते हैं कि पंचायतों का ग्रामीण रूप कभी नष्ट नहीं हुआ। आज भी जाति विषयक मामले पंचायतों द्वारा ही तय किये जाते हैं। स्वतन्त्रता प्राप्त करने के उपरान्त हमारी सरकार का ध्यान पंचायतों के पुनर्गठन की ओर गया।

फलस्वरूप पंचायत राज – कानून पारित किया गया। इसके अनुसार प्रत्येक गाँव या ग्रामों के समूह के लिए एक सभा होती है, (प्रायः एक हजार जनसंख्या वाले गाँव में एक ग्राम सभा होती है) जिसे ग्राम सभा कहते हैं। इस संस्था का सदस्य बनने के लिए कम से कम आयु 21 वर्ष रखी गई। पागल, अपराधी , कोढ़ी , दिवालिये आदि इनके सदस्य नहीं हो सकते। संस्था एक कार्यकारिणी समिति होती है, जिसमें जनसंख्या के अनुसार 30 से 41 सदस्य तक होते हैं, जिसे ग्राम पंचायत कहते हैं।

इसका एक प्रधान होता ह, प्रधान की सहायता के लिए उपप्रधान भी होता है। इस समिति के सदस्य प्रायः पाँच वर्ष के लिए चुने जाते हैं। तीन या पाँच ग्राम सभाओं के मध्य एक ‘ अदालती पंचायत ‘ होती है। इसका प्रधान सरपंच ‘ कहलाता है। पंचायत राज्य कानून द्वारा स्थानीय ग्राम – शासन व्यवस्था का भार ग्रामीण जनता को ही दे दिया है ; किन्तु फिर भी पंचायतों के अधिकार सीमित हैं । दीवानी , फौजदारी और माल के साधारण मुकद्दमों का फैसला ग्राम पंचायत द्वारा ही किया जाता है।

इस प्रकार गाँव वालों का बहुमूल्य समय नष्ट होने से बच जाता है, जो नगरों की अदालतों में प्रायः नष्ट हो जाया करता है। क्योंकि ग्रामों की जनता अधिकांशतः अब भी अशिक्षित है इसलिए उसमें परस्पर छोटे – मोटे झगड़े होते ही रहते हैं। गाँव के लोगों को इन झगड़ों का कारण ज्ञात होता ही है इसलिए न्याय लगभग ठीक ही हो जाता है। इसके अतिरिक्त ग्राम पंचायतों को अनेक कार्य करने पड़ते हैं। शिक्षा का प्रसार किया जाता है।

पुस्तकालयों तथा वाचनालयों की स्थापना करके गाँव की जनता के ज्ञान की वृद्धि की जाती है। स्वास्थ्य – रक्षा के ऊपर विशेष ध्यान दिया जाता है , औषधालय खुलवाये जाते हैं। व्यायामशालाओं का निर्माण भी पंचायतों द्वारा किया जाता है। गाँव के अन्दर गन्दे पानी के गड्ढों को भरवा दिया जाता है, जहाँ कि भिन्न – भिन्न प्रकार के विषैले कीटाणु उत्पन्न हो जाते हैं। कृषि की उन्नति के लिए खाद तैयार करना, सिंचाई का प्रबन्ध करना, सड़क बनवाना आदि कार्य पंचायतों द्वारा ही किये जाते हैं। गाँव में पुलिस का अभाव रहता है, इसलिए रात्रि को चोर – डाकुओं से बचने के लिए पहरा देने वाली मण्डलियाँ बना दी जाती हैं।

प्रकाश के लिए लालटेनों का प्रबन्ध किया जाता है। इन कार्यों को पूरा करने के लिए ग्राम पंचायतों को धन की आवश्यकता होती है जिसके लिए वे सरकार से सहायता प्राप्त करती हैं- किसानों पर उनके लगान के अनुसार कर लगाती हैं। दण्ड आदि में प्राप्त हुआ धन भी इन्हीं सार्वजनिक कार्यों में खर्च किया जाता है।  जिन कार्यों में अधिक रुपया व्यय होता है, उन्हें पूरा करने के लिए चन्दा एकत्रित किया जाता है। पंचायत राज्य एक आदर्श व्यवस्था है।

देश की जनता में सुख और शान्ति स्थापित करने का एकमात्र उपाय है। यही सबसे उत्तम शासन प्रणाली है। यदि ग्राम पंचायतों के सदस्य अपने कार्यों का सम्पादन सच्चाई, ईमानदारी और सद्भावना से करें एवं सहयोग एकता और सेवा को अपने कार्यों का लक्ष्य बनावें तो वह दिन दूर नहीं जबकि ग्रामीण जनता सुख और आनन्द का अनुभव करने लगेगी। सम्पूर्ण सार्वजनिक कार्यों में रुचि के साथ भाग लेगी। वास्तव में इसी में देश और जनता का कल्याण निहित है।

निष्कर्ष 

निष्कर्ष रूप में हम कह सकते हैं कि “ग्राम पंचायत पर निबंध essay on gram panchayat in hindi” कोई प्रजातन्त्र प्रणाली उसी दशा में सफल ठहराई जा सकती है जब समाज सुख के सपनों में विहार कर रहा हो और यह कल्पना ग्राम पंचायतों के द्वारा ही साकार हो सकती है क्योंकि ग्राम पंचायतें ही देश को आत्म निर्भरता की ओर ले जाने में समर्थ हो सकती हैं। अतः जब स्वतन्त्र भारत में संविधान का निर्माण हो रहा था तो उसकी 40 वीं धारा में इस बात का निम्न रूप में स्पष्ट उल्लेख है – राज्य ग्राम पंचायतों का संगठन करने के लिए अग्रसर होगा तथा उन्हें ऐसी शक्तियाँ और अधिकार प्रदान करेगा जो उन्हें स्वायत्त शासन की इकाइयों के रूप में कार्य करने योग्य बनाने के लिए आवश्यक है।

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