insta millionaire full story pdf part- 3

क्या आप भी insta millionaire full story pdf  के बारे जानना चाहते हैं और आप इसे डाउनलोड करना चाहते हैः तो आपके लिए लेकर आये हैं दुनिया के सबसे ज्यादा सुनने वाला आइडिओ सीरीज कहानी। जिसमे एक लड़का के ऊपर बनाया गया हैं यह कहानी प्यार और ईष्या से भरपूर हैं इस कहानी को pocket Fm से लिया गए हैं  अभी तक इस कहानी को 534 मिलियन से अधिक बार सुना गया हैं और इसको 4.5 से अधिक का रेटिंगं दिया गया हैं। तो आइये आप भी इस कहानी को पढ़िए।

इसके पहले इस कहानी का तीसरा एपिसोड भी पब्लिस किया गया हैं उसको अभी तक आप नहीं पढ़े हैं तो आप पढ़ सकते हैं ताकि कहानी को अच्छी तरह से समझ सके।

Insta Millionaire

Author: Swapnil Jain

Narrator: Suraj Kumar

182 hrs 21 mins

लेंथ All Episodes(932)

millionaire full story pdf hindi 1 एपिसोड पढ़े  

 

2 एपिसोड का अंत भाग

पिछले एपिसोड में हमसब ने पढ़ा था की दो सेकंड बाद मशीन में से एक आवाज आने लगी। उसके अंदर एक लाल बत्ती जल रही थी और वो ज़ोर ज़ोर से आवाज कर रही थी तुम्हारा फिंगर प्रिंट मैच नहीं कर रहा है। मैंने पहले ही बोला था की कोई खाता नहीं है। बैंक में तुम्हारा मैनेजर ने लकी को ऐसे  देखा जैसे वो कोई बड़ा अपराधी था। मैनेजर उसकी पैंट की ओर देखने लगा। उसे लग रहा था कि लकी ने अपनी जेब में कोई हथियार छुपा रखा था और वो मैनेजर को बेवकूफ बना रहा था।

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2 एपिसोड यहाँ से पढ़े।

लकी बैंक के अंदर दाखिल तो हो गया था, लेकिन जब मैनेजर ने उससे पैसे निकालने के लिए कार्ड मांगा तो उसके पास कार्ड नहीं था। उसकी फटेहाल हालत देखकर पहले ही मैनेजर को गुस्सा आ रहा था और उसमें लकी नहीं है। डिमांड रख दी थी कि वो फिंगर प्रिंट से पैसे निकलवाना चाहता था लेकिन पानी तब सर के ऊपर से निकल गया जब उँगली मैच नहीं हुई थी। मैनेजर ने फ़ोन निकाला और पुलिस को फ़ोन लगाने लगा ।

अरे अरे ये क्या कर रहे हो? देखिये सर, मेरी बात सुनिए, मैं कोई क्रिमिनल नहीं हूँ, मैंने गलत लास्ट बार फिंगर प्रिंट लगाने दो प्लीज़ लकी ने उसके सामने हाथ जोड़ते हुए कहा,  अबकी बारअगर नहीं लगी ना तो फिर ये मत कहना कि मैं अगली ऊँगली भी ट्राई करके देखता हूँ, बार बार ऐसा नहीं चलने वाला। अगर ये वाली काम नहीं की तो मैं सीधा पुलिस को फ़ोन करने वाला हूँ।

अभी मैनेजर ने लकी को धमकाते हुए कह। उसने अपने एक हाथ में मशीन और दूसरे हाथ में मोबाइल फ़ोन पकड़ा हुआ था। उसने अपनी स्क्रीन पर पुलिस का नंबर खोल रखा था और उसका अंगूठा हरे बटन पर ही टिका हुआ था। इधर लकी ने अपने सीधे हाथ की ऊँगली को अपने पेंट से साफ किया और भगवान का नाम लेकर उसे उस मशीन पर लगा दिया।

जैसे ही उसकी ऊंगली उस मशीन पर पड़ी। आपकी बार फिर मशीन से आवाज आई। और वो चमककर हरी हो उठीं। तभी मैनेजर के मोबाइल पर एक मैसेज आया। मैनेजर ने उस मैसेज को पढ़ना शुरू किया। वेरिफिकेशन सक्सेसफुल खाता नाम लक्ष्मण लाल अग्रवाल खाता नम्बर 0104004 जैसे ही मैनेजर ने इस मैसेज को देखा उसकी आंखें फटी की फटी रह गई थी। उस मशीन पर चमकती लाइट को देखते हुए लकी की आंखें भी चमक आई थी। लकी हरी बत्ती को देखते ही झूम उठा था और फिर उसने मैनेजर को घूरकर देखा।

उसके दिमाग में वो सारी बातें चल रही थी, जो मैनेजर उससे अभी थोड़ी देर पहले सुना रहा था। इधर मैनेजर में उसके आगे हाथ जोड़े और किसी अगर हंसते हुए कहा लक्षण सर प्लीज़ मुझे मुझे माफ़ कर देना सर, मै इस ब्रांच में नया नया आया हूँ और इसलिए मुझे मालूम नहीं था कि आप कौन हो। मैं इस ब्रांच का कस्टमर मैनेजर शशिकांत शर्मा प्लीज़ आगे भी मेरा ध्यान रखना सर प्लीज़ सॉरी सर हाँ हाँ ठीक है तू मुझे यह बताओ कि मेरे खाते में कितने पैसे रखे हुए? लकी ने कहा। और वो सोफे पर बैठ गया।

मैनेजर उसके सामने ही खड़ा हुआ था और उसके खाते की जानकारी अपने फ़ोन पर ही निकाल रहा था। उसने अपने फ़ोन पर इधर उधर कुछ उंगलियां चलाईं और बोला। हो गया सर आप आपके खाते में इस वक्त ₹90,80,70,650 रखे हुए है सर। शशिकांत के खुद के होश इतनी बड़ी रकम को देखने के बाद उड़ गए थे। उसे विश्वास नहीं हो रहा था कि इस आदमी के खाते में इतना पैसा भी हो सकता था। लकी की शक्ल देखकर तो यही लग रहा था कि उसकी उम्र 20 से 22 साल से ज्यादा नहीं थी। ऐसे में अगर उसके खाते में इतना सारा पैसा रखा हुआ था तो ये वाकई बहुत बड़ी बात थी।

श्रीकांत अपने मन में यह सोच रहा था कि दुनिया के 99% लोग ही अपनी पूरी जिंदगी काम करने के बाद भी इतना पैसा नहीं कमा सकते थे जितना की लकी के हाथ में इतनी छोटी सी उम्र में रखा हुआ था। लेकिन लकी नहीं, इधर जब उसके फ़ोन में अपने खाते पर पड़ी हुई जानकारी को देखा तो उसे कुछ अजीब सा लगा। उसे लग रहा था कि उसे तुरंत इतने पैसों के हिसाब से अब अपनी जिंदगी को ढालने की कोशिश करनी शुरू कर देनी चाहिए, वरना उसके साथ वही होने वाला था जो आज बैंक में उसके साथ हुआ था।

अरे सर खाते में पैसे के अलावा और भी चीज़े है। जो मैं आपको बताना चाहता हूँ, सर। मैनेजर ने फिर से अपने फ़ोन पर उंगलियां फिर आई और बोला, एक तो आपके खाते में एक फ़रारी जुड़ी हुई दिखा रहा है सर। इसके अलावा आपके खाते में दो किलो सोने की 100 ईटें रखी हुई है। पांच किलो सोने की 20 ईंटे पिकासो की तीन असली पेंटिंग है। 20 हीरे 24 कैरेट की और भी बहुत कुछ है। मैनेजर ने हांफते हुए और अपने पसीने से साफ करते हुए कहा, इतना सारा धन देखने के बाद जो शशिकांत की आंखें तो बाहर ही निकल आयी थी, उसने कभी लकी जितना अमीर आदमी अपनी जिंदगी में नहीं देखा था, जितना पैसा और सोना और जायदाद उसके पास था, उसका 10% फीस ब्रांच में किसी और के पास नहीं था।

ठीक है, चलो मुझे कार्ड दे दो। लकी ने अपने दोनों हाथों को अपने सिर के पीछे रखते हुए कहा। जी जी सर मैं अभी आपके लिए एक नया कार्ड बनवा देता हूँ सर मुझे बस 10 मिनट दीजिए सर बस 10 मिनट। शशिकांत ने कहा और फिर लकी के सामने ही निकल गया। जितनी देर में लकी ने अपने फ़ोन पर फिर से उस मैसेज को खोलकर देखा उतनी ही देर में मैनेजर उसके लिए एक चमकता हुआ सुप्रीम कोर्ट लेकर उसके सामने आ गया था।

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आगे कहानी अभी जारी हैं……

लेकिन उस कार्ड को देखने के बाद न जाने क्यों मैनेजर को ऐसा लग रहा था की ये कार्ड लकी की संपत्ति के आगे कुछ भी नहीं था। फिर भी मैनेजर इसमें कुछ नहीं कर सकता था क्योंकि वो जानता था कि उसके पास इस ब्रांच में इससे बड़ा और कोई कार्ड नहीं था। इसलिए फिलहाल वो लकी को यही दे सकता था।

उसने उस कार्ड पर लकी का पूरा नाम लक्ष्मण लाल अग्रवाल गुदवा किया था। लीजिए सर आपका कार्ड, पासवर्ड वगैरह सर आपको ईमेल पे मिल जाएगा। शशिकांत ने मुस्कुराते हुए कहा और वो लकी के सामने हाथ बढ़कर खड़ा हो गया। इधर लकी ने उस कार्ड को उलट पलट कर देखा और फिर अपनी जगह से खड़ा होकर वो बाहर निकलने लगा। शशिकांत का मन तो यही कर रहा था की वो उसे दरवाजे तक छोड़ने जाएं, लेकिन उसकी ड्यूटी ऐसी ऑफिस में थी और वो किसी को बाहर छोड़ने नहीं जा सकता था। फिर भी वो लकी के लिए दरवाजा खोलने के लिए आगे आ गया था।

इधर यासमीन अपने केबिन में अपना सिर पकड़े हुए बैठी थी। उसे समझ नहीं आ रहा था कि आखिर अंदर चल क्या रहा था? एक पल को तो उसे लगा की लड़का पागल नहीं बल्कि बदमाश था। और उसने शशिकांत को बंदी बना लिया हो, लेकिन जब वो लकी के लिए कार्ड लाने के लिए अपने दफ्तर से बाहर आया तो यह यासमीन को लगा कि कुछ गडबड नहीं हुई थी। फिर ये इतनी जल्दी में। अपने आप से पूछा। शशिकांत को सुरक्षित देख बैंक के बाकी लोग भी दरवाजे पर से पीछे हट गए थे।

वैसे भी उसे देखते ही सब लोग अपनी अपनी जगह पर वापस दौड़ें चले जाते थे। शशिकांत का धौस ही ऐसा था की उसकी आँखों की झलक भर से खड़ा कर्मचारी जाकर धोनी कुर्सी पर बैठ जाता था। लेकिन एक बार शशिकांत के बाहर आने के बाद वो दोबारा बाहर भी नहीं आया था और ना ही लकी कमरे से बाहर आया था। इधर यहाँ यासमीन परेशान हुए जा रही थी। वो जानती थी कि अगर कुछ भी गडबड हुआ तो सबसे पहले उसकी नौकरी जाने वाली। उसने बड़ी मुश्किल से और मेहनत करके इस नौकरी को हासिल किया था और वह किसी पागल की वजह से इसे अपने हाथ से नहीं जाने देना चाहती थी।

जैसे ही परेशान यासमीन ने अपनी नज़र उठा कर फिर से उस कमरे की ओर देखा तो पाया कि लकी बहुत ही आराम से उस कमरे से बाहर निकलकर दरवाजे की ओर बढ़ता चला जा रहा था। रुको, तुम इस तरह नहीं जा सकते। या यासमीन ज़ोर से चिलाई और भागते हुए लकी के पास चली गई। तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई जबरदस्ती हमारे वीआइपी रूम में घुसे चले जाने की? यासमीन ने गुस्से में पूछा। उसका मन तो यही कर रहा था की वो अभी लकी का गिरबान पकड़कर उसे झकझोर दे, लेकिन उसने अपने आप को रोक रखा।

मैंने पहले भी कहा था ना आपसे, मैं यहाँ सिर्फ अपना पैसा लेने आया था और कुछ नहीं। लकी ने कहा और मुस्कुराने लगा यासमीन ने देखा कि उसके हाथ में एक सुप्रीम कार्ड था और वो उसकी उंगलियों के बीच चमक रहा था। यासीन के दिमाग में आया कि लकी ने ये कार्ड कहीं अंदर से चुरा तो नहीं लिया और इससे पहले कि वो यहाँ से चोरी करके भागता या अशविन ज़ोर से चिल्लायी सिक्योरिटी सिक्योरिटी? उसकी आवाज को सुनते ही दो बंदूक वाले गार्ड भागे भागे यासमीन के पास आये। ये चोरी करके भाग रहा है, पकड़ो इससे। लकी ने जब यासमीन के मुँह से ये बात तो उसके कान खड़े हो गए।

इससे पहले की वो वहाँ से अपनी जान बचाकर भाग पाता। सिक्योरिटी वालों ने उसे धर दबोच लिया था और फिर उसकी जेब टटोलने लगे थे। इधर, यास्मीन ने देखा कि वो सुप्रीम कार्ड पर उसने अपना नाम भी लिखवा दिया था। तुम्हारी इतनी हिम्मत की तुम डराकर नाम भी लिखवा लिया। इस पर इसकी जेब चेक करो। यासमीन ने गुस्से से कहा। दोनों में से एक गार्ड लकी की जेब टटोलने लगा था। लकी की समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर ये लड़की उसको समझ काया रही हैं।

अगर उसे या उसकी संपत्तियां सिर्फ उसके परिवार के बारे में भी पता चल जाता है तो भी आश्विन उसके पैरों में गिर जाती है। इससे पहले की लकी अपनी सफाई में कुछ कह पाता। एक गार्ड बोला। उसकी जेब में तो कुछ नहीं है बल्कि फटी हुई जेब है। तभी उसकी बात सुनकर दूसरे सिपाही ने कहा, मैडम हो सकता है जेब में पहले चाकू रखकर लाया हो और उसको निकालते वक्त उसी चाकू से उसकी जेब फट गयी होगी। मुझे थोड़ा सा ही लग रहा है। दूसरे सिपाही ने अपनी लड़खड़ाती जुबान में बोल।

अरे पागल हो क्या ये सब आप लोग क्या बोल रहे हो? इससे पहले कि लकी आगे कुछ बोल पता, एक गार्ड ने उसके दोनों हाथों को मरोड़ दिया था। इधर ये यासमीन अपने मन में सोच रही थी की अगर वो चाकू लाया था तो फिर वो चला कहा गया था। बाप रे। अचानक से यास्मिन की आंखें बड़ी सी हो गई थी, उसे लगा कि लकी ने उस चाकू से शशिकांत का खून कर दिया था। यासमीन ने तुरंत अपना फ़ोन निकाला और पुलिस को फ़ोन मिलाते हुए कहा, हैलो पुलिस स्टेशन्स। मैं न्यू सिटी बैंक से बोल रही हूँ। हमारी बैंक में एक सनकी चोर घुस आया है और उसने हमारी कस्टमर मैनेजर का खून कर दिया है। आप प्लीज़ जल्दी आ जाइए सर।

यासमीन ने घबराते हुए कहा और फ़ोन रख दिया। तब तक दोनों गार्ड ने लकी को नीचे घुटने के बल बैठा दिया था और उसके सिर पर बंदूक तान दी थी। जैसे ही बाकी लोगों ने भी अपनी आँखों के सामने ये मंजर देखा तो वो सब लोग भी लकी के आसपास घेरा बनाकर खड़े हो गए। अंदर बैठे मैनेजर ने जब इस हलचल को देखा तो वो भी अपना सारा सिस्टम बंद करके बाहर आ गया। अरे क्या हो रहा है? ये सब उसने ज़ोर से आवाज देते हुए पूछा। जैसे ही सब लोगों ने उसकी आवाज सुनी तो वो चौंक गए और शशिकांत वर्मा की ओर देखने लगे।

देखने वालों में यासमीन भी शामिल थी और उसने देखा कि उसका मैनेजर तो वो जिंदा है और सही सलामत उसकी आँखों के सामने खड़ा था। सर आप जिन्दा है? यासमीन ने खुशी और आश्चर्य भरे भाव के साथ शशिकांत की ओर देखते हुए कहा, लेकिन अगले ही पल उसकी खुशी की जगह दुख ने ले ली थी। उसे एहसास हो रहा था कि आखिर उसने कितनी बड़ी गलती कर दी थी। ये यासमीन ने अपनी ही जुबान काट ली थी और उसके जाली पर नमक छिड़का। शशिकांत उसने कहा मैं क्यों इतनी जल्दी मरने लगा और तुमने ये सब क्या तमाशा लगा रखा है? उसने कहा और फिर उस भीड़ की ओर बढ़ने लगा।

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कहानी अभी आगे जारी हैं….

जैसे ही वो आगे आया उसने देखा कि उन लोगों ने लकी को गन पॉइंट पर बैठा रखा है। अरे किसने किया? किसने किया ये? शशिकांत तुरंत लकी की ओर दौड़ा और उसने उसके पास खड़े दोनों गार्ड्स को हटा दिया। फिर लकी को उठाने के लिए उसने अपना हाथ उसकी ओर बढ़ा दिया और बोला। सर आई ऐम रियली सॉरी सर, इस बेवकूफ़ी के लिए मैं आपसे माफी माँगता हूँ सर आई ऐम रियली सॉरी सर। शशिकांत उसके पैरों में ही गिरने को हो गया था। उसका हाथ पकड़कर लकी खड़ा हुआ और फिर यासमीन की ओर घूरने लगा।

आप पूछ रहे थे ना ये किसने किया, किसने किया है ये? यह काम इसने किया हैं सिर्फ इतना ही नहीं किया बल्कि उसने पुलिस को भी बुला लिया है। इसे लग रहा है कि मैं कोई क्रिमिनल हूँ जिसने आपका खून कर दिया है और और आपके द्वारा दिया गया इस  को कार्ड चुराकर भाग रहा हूँ। ये कार्ड जो आपने मुझे दिया। लकी यासमीन की ओर ऊँगली दिखाते हुए गुस्से में कहा अचानक ही सब लोग थोड़ा पीछे हटकर यासमीन को देखने लगे थे।

यासमीन घबराई हुई थी। फर्श पर देखती कभी छत को देखी जा रही थी। यासमीन माम् जो मैं सुन रहा हूँ क्या वो सच हैं? शशिकांत ने यासमीन को घूमते हुए गुस्से में पूछा। उसकी आँखों में छुपे गुस्से को यासमीन बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी इसलिए उसकी ना तो लकी से और न ही शशिकांत से नज़र मिलाने की हिम्मत हो रही थी। फिर भी वो जानती थी कि उसका चुप रहना इस वक्त उसके लिए बहुत खतरनाक हो सकता था। इसलिए उसने कहा। इस सब मेरी गलती है सर, ये मेरी बहुत बड़ी मिसअंडरस्टैंडिंग है सर मुझे लगा कि ये जबरदस्ती अंदर घुस आया है और इसने आपके ऊपर हमला करके आप से जबरदस्ती ये कार्ड बनवा लिया है और फिर आप को मार दिया है सर।

यासमीन ने घबराते हुए कहा। उसकी डरी सहमी सी आँखों में अब आंसू भी आ गए थे। मैनेजर ने जब उसकी ये बात सुनी तो उसने अपना सिर पकड़ लिया। यासमीन जैसी समझदार लड़की इतनी बड़ी भूल कैसे कर सकती थी? उसने लकी को पहचानना ही नहीं था है। मैनेजर को लगा कि इसमें उसकी कोई गलती नहीं थी। जब वो खुद लकी को नहीं पहचान पाया था तो फिर? कैसे पहचान पाती ? इसलिए उसने सोचा कि सबके सामने उसे कुछ कहने से अच्छा था कि वह यासमीन को एक कोने में ले जाकर लकी की सच्चाई बताएं।

शशिकांत ने उसका हाथ पकड़ा और उसे खींचकर अपने साथ खंभे के पास ले गए और बोले। तुम्हें मालूम है ये कौन है? अरे ये लक्ष्मण अग्रवाल है लक्ष्मण अग्रवाल खानदान का वारिस तुम्हें पता है ना की अग्रवाल खानदान का खाता? हमारे बैंक की जितनी भी शाखाएं हैं उसमें सबसे बड़ा खाता है। यासमीन ने जैसे ही ये नाम सुना उसके पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई थी। वो जानती थी कि अगर यू सिटीबैंक इतनी ऊंचाइयों पर पहुंचा था उसके पीछे अग्रवाल खानदान का सबसे बड़ा हाथ था। इस बात का जिक्र उससे तब भी किया गया था जब उसने नौकरी जॉइन की थी।

तुम्हें पता है इस लड़के के नाम पे कितनी प्रॉपर्टी है? ये अपने दम पर ना इस पूरे एरिया को खरीद सकता है। शशिकांत ने ये यासमीन से कहा। यासमीन जैसे जैसे लकी को देखी जा रही थी, वो बड़ी बड़ी आँखों से उसे भूले जा रही थी। लकी कभी उन दोनों को देख रहा था तो कभी अपने आसपास खड़े लोगों को देख रहा था। अब सबसे पहले तो पुलिस को फ़ोन करो और उनसे कहो कि हमसे गलती हो गयी थी और उसके बाद जाकर तुम उनसे भी माफी मांगो और अगर उन्होंने तुम्हें माफ़ कर दिया तो तुम्हारी किस्मत वरना समझ लेना कि तुम्हारी नौकरी चली गई।

शशिकांत ने कहा और दौड़कर लकी के पास जाकर खड़ा हो गया। इधर यासमीन अभी भी वहीं पर खड़ी थी। अभी अभी जो शशिकांत उसे बताकर गया था वो यासमीन पचा नहीं पा रही थी। उससे लग रहा था कि इसमें उसकी कोई गलती नहीं थी, लेकिन कोई उसकी सुनने वाला नहीं था। बैंक उस छोटी सी मैनेजर के चक्कर में अपने सबसे बड़े कस्टमर को छोड़ने वाला तो नहीं था। अब मेरे पास और कोई रास्ता नहीं बचा है। यह यासमीन ने निराश होते हुए अपने आप से कहा और फिर अपनी जेब से फ़ोन निकालकर पुलिस थाने में फ़ोन लगाया।

जैसे ही यासमीन ने पुलिसवालों से ये कहा कि उससे गलती हो गयी और जैसे वो बदमाश समझ रही थी, असल में वो बदमाश नहीं बल्कि शहर के सबसे बड़े रईस का बेटा था तो उधर से आवाज आयी। मैडम सॉरी लेकिन अब तो गाडी निकल गयी हैं वहाँ पहुंचती होगी। अब आपको जो भी कहना है इंस्पेक्टर साहब से कह देना। और उस पुलिस वाले ने फ़ोन काट दिया। मर गए। यासमीन ने अपने आप से निराश होते हुए कहा उसके हाथ थर थर कांप रहे थे, उसे समझ नहीं आ रहा था की वो क्या करे।

अब उसके पास लकी से माफी मांगने के अलावा और कोई चारा नहीं बचा था। लेकिन अगर लकी सर ने मुझे माफ़ नहीं किया और उल्टा मेरे ऊपर डेस्टिनेशन का चार्ज लगा दिया तो? यासमीन ने अपने आप से कहा और वो अब और भी ज्यादा घबरा गई थी। उसने देखा कि लकी उसे घूरकर देख रहा था। शशिकांत पूरी कोशिश कर रहा था की वो लकी को शांत करवा सके लेकिन लकी वहाँ से हिलने का नाम तक नहीं ले रहा था यासमीन उसके पास पहुँच गई थी।

वैसे तो वो जानती थी कि उसे माफी मांगने से उसकी किस्मत बदलने वाली तो थी नहीं। फिर भी उसने एक बार कोशिश करनी चाहिए और नजदीक से कहा सर मैं आपको गलत समझ रही थी सर ऐक्चुअली आपके यासमीन ने उसके कपड़े को देखा और एक सांस लेते हुए आगे बोली इसे प्लीज़ मुझे माफ़ कर दीजिए सर मेरी इंटेन्शन आप को हर्ट करने की बिल्कुल भी नहीं थी। मैं तो जो कुछ कर रही थी, बैंक की सेफ्टी के लिए कर रही थी।

इट्स ओके कोई बात नहीं। लकी ने कहा और उसके हाथ से अपना सुप्रीम कोर्ट ले कर निकल गया। यासीन को अपने कानों पर तो विश्वास ही नहीं हो रहा था, वो मान ही नहीं पा रही थी कि लकी ने उसे माफ़ कर दिया था। उधर लकी को अपने आप पर विश्वास नहीं हो रहा था की वो रातोंरात इतना अमीर हो गया था। आखिर लकी इतने पैसों का क्या करने वाला था? क्या उसके खाते की बैलेंस की तरह वो भी रातों रात बदल जाता? ये पैसा उसकी जिंदगी को क्या दिशा देने वाले थे? क्या यासमीन  की नौकरी बच गया? इतने पैसा को देखकर डिम्पल लकी से दोस्ती करेगी?

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