शिवाजी महाराज का जन्म,शिक्षा, महत्त्वपूर्ण घटना से जुडी बातें shivaji mharaj photo

आज हम सब भारत के वीर सपूत छत्रपति शिवाजी महाराज (shivaji mharaj) के बारे में शॉर्ट आर्टिकल के माध्यम से जानकारी प्राप्त करेंगे उनकी जीवन की कुछ महत्त्वपूर्ण घटना क्रम को जानने की भी कोशिश करेंगे। मैं आशा करता हूँ कि यदि आप पूरा आर्टिकल को ध्यान से पढ़ लेंगे। तो उनके जीवन से जुड़ी बहुत कुछ जानकारी प्राप्त कर लेंगे, और उनके द्वारा किए कार्यो से कुछ सीख लेंगे। तो समय को ध्यान रखते हुए उनके बारे में सब कुछ जानने की कोशिश करते हैं।

भारत के वीर सपूतों मे एक शिरोमणि छत्रपति शिवाजी महाराज का नाम आज भी बड़े गर्व के साथ लिया जाता है। इन्हें हिन्दू ह्रदय स्मार्ट कहा जाता है,उन्हें मराठा भी कहा जाता है। छत्रपति शिवाजी का पूरा नाम शिवाजी भोसले था। शिवाजी का जन्म मराठा परिवार में सन् 1627 ई ० पूना के पास एक किले में हुआ था।

 

मुसलिम बिरोधी नहीं थे shivaj mharaj

शिवाजी मुसलिम बिरोधी नहीं थे लेकिन बहुत लोगों द्वारा कहा जाता है कि वह बिरोधी थे आपको यह भी जानकारी ही होना चाहिए कि उनके सेना में भी मुसलिम थे। शिवाजी महाराज(shivaji mharaj) 

हिन्दुओ पर अत्याचार के खिलाफ थे दिन प्रत्येक दिन हिन्दुओ को मरना, अत्याचार करना, मंदिर तोड़ना यह सारे कार्य मुसलामानों द्वारा किया जाता था इन्हीं सब बातों को लेकर शिवाजी ने हिन्दू राष्ट्र निर्माण की नीव रखी।

समस्त भारतवर्ष में मुसलमानों का राज्य स्थापित हो चुका था। हिन्दू – जनता उनके अत्याचारों से बहुत ही दुःखी थी। निराश्रित प्रजा की कहीं नहीं सुनी जाती थी। यवनों की कट्टरता अपनी पराकाष्ठा तक पहुँच गई थी।

हिन्दुओं के अधिकारों का बड़ी निर्दयता से दमन हो रहा था। इन्हें पग – पग पर घोर विपत्तियों का सामना करना पड़ रहा था। हिन्दुओं के धार्मिक ग्रन्थ जलाये जाते थे। तीर्थ स्थानों को नष्ट किया जाता था। हिन्दू इतने अशक्त हो चुके थे कि उनमें आत्म – रक्षा की शक्ति प्रायः नष्ट हो गई थी।

शिवाजी महाराज का जन्म(shivaji mharaj)

ऐसी परिस्थितियों में वीर शिरोमणि छत्रपति शिवाजी का आविर्भाव हुआ। शिवाजी का जन्म सन् 1627 ई ० में पूना के पास एक किले में हुआ था। इनकी माता का नाम जीजाबाई था। बाल्यावस्था से ही माता ने अपने पुत्र को वीरतापूर्ण कहानियाँ सुनाईं। इनकी इच्छा थी कि शिवाजी एक वीर और पराक्रमी महापुरुष बने। माता की शिक्षा का बालक पर पर्याप्त प्रभाव पड़ा।

 

शिवाजी महाराज

शिवाजी का शुरुआती शिक्षा

शिवाजी के पिता का नाम शाहजी था। वे बड़े युद्ध कुशल सरदार थे शिवाजी की शिक्षा का भार दादा कोंणदेव को सौंपा गया। ये बड़े ही योग्य और सक्षम पुरुष थे। शिवाजी ने बाल्यावस्था में ही कुश्ती लड़ना, घोडे की सवारी करना, अस्त्र – शस्त्र चलाना आदि कार्य भली-भाँति सीख लिए। दादा कोंणदेव की शिक्षा के परिणामस्वरूप शिवाजी में आत्म-विश्वास,साहस, वीरता आदि गुणों का पूर्ण रीति से विकास हुआ। उन्होंने हिन्दू – धर्म , हिन्दू जाति तथा हिन्दू राष्ट्र के पुनरोद्धार को अपने जीवन का ध्येय बनाया।

समर्थ गुरु रामदास

समर्थ गुरु रामदास के उपदेशों से उनमें अलौकिक आत्म शक्ति का उदय हुआ। सबसे पहले शिवाजी ने मरहठा जाति को सुसंगठित किया। तदुपरान्त उन्होंने इधर – उधर छापे मारना शुरू किया। शीघ्र ही शिवाजी महाराज ने अनेक किलो पर अधिकार जमा लिया। बीजापुर के सुल्तान ने शिवाजी को पकड़ने का भरसक प्रयास किया किन्तु वह असफल रहा। इस पर सुल्तान ने साहजी को कैद कर लिया। शिवाजी ने यह देखकर मुगलों से लिखा पढ़ी प्रारम्भ की और अपनी कूटनीति से अपने पिता को छुड़ा लिया।

 

धोखेबाज अफजलखाँ

बीजापुर के सुल्तान आदिलशाह ने अफजलखाँ को शिवाजी को पकड़ने के लिए भेजा। खान शिवाजी को कहलवा भेजा कि तुम मुझसे अकेले आकर मिलो तो मैं बादशाह से तुम्हारे अपराध क्षमा करवा दूँगा। शिवाजी ने यह प्रस्ताव स्वीकार कर लिया, किन्तु जिस समय दोनों मिले तो खान ने शिवाजी महाराज(shivaji maharaj) के ऊपर तलवार का प्रहार किया। शिवाजी ने तुरन्त ही खान को ऐसा उत्तर दिया कि वह तुरन्त मर गया।

 

मरहठों की छिपी हुई सेना ने अविलम्ब ही अफजलखाँ की सेना पर आक्रमण कर दिया और उसे मार भगाया। इस समय दिल्ली का बादशाह औरंगजेब था। वह हिन्दुओं पर बहुत ही अत्याचार करता था। शिवाजी (shivaji mharaj) ने मुगलों के राज्य में भी छापे मारने प्रारम्भ कर दिए। दक्षिण में शिवाजी की इस हलचल को शान्त करने के लिए औरंगजेब ने शाइस्ताखाँ को भेजा शिवाजी ने अचानक उसके ऊपर आक्रमण कर दिया। और वह अपनी जान बचाकर भाग गया।

इसके उपरान्त औरंगजेब ने जयसिंह को भेजा शिवाजी ने उसके साथ सन्धि कर ली और वे उसके साथ आगरे चले आये। जहाँ वे अपमानित हुए। वे कैद कर लिए गये, किन्तु शिवाजी महाराज एक टोकरी में बन्द होकर कैद से बाहर आ गये और फिर दक्षिण पहुँच गये औरंगजेब ने कुपित होकर एक बार शाहजादा मुअज्जम और जयसिंह को भेजा किन्तु इस बार इनका प्रयत्न असफल ही रहा। अन्त में औरंगजेब को निराश होकर मुँह की खानी पड़ी।

शिवाजी ने अहमदाबाद आदि राज्यों से चौथ वसूल की और खानदेश पर भी आक्रमण किया। अब शिवाजी ने अपने आप को स्वतन्त्र राजा घोषित कर दिया। बड़ी धूमधाम के साथ रायगढ़ में इनका राज्याभिषेक संस्कार सम्पन्न हुआ। शिवाजी का शासन प्रबन्ध उच्च कोटि का था। राज्य में सारी भूमि की नाप कराई गई और उपज के हिसाब से लगान निर्धारण किया गया।

सेना का समुचित प्रबन्ध किया। उसने अष्ट प्रधान मन्त्रिमण्डल की स्थापना की। इस सभा का शिरोमणि पेशवा होता था। शिवाजी इन्हीं मन्त्रियों की सहायता से राज्य प्रबन्ध करते थे। उनके राज्य में प्रजा सुखी थी तथा शासन न्यायपूर्वक होता था। शिवाजी महाराज का चरित्र उच्च कोटि का था। वे धर्म – प्रिय व्यक्ति थे। उनमें धार्मिक सहिष्णुता पूर्ण रूप से पायी जाती थी। वे मुसलमानों के सन्तों और धर्म ग्रन्थों का पूर्ण आदर करते थे।

 

शिवाजी महाराज का मुसलमान स्त्रियों सम्मान

मुसलमान स्त्रियों को भी सदैव सम्मान की दृष्टि से देखते थे। उनकी सब सैनिकों के लिए आज्ञा थी कि मुसलमानों की स्त्रियों की सब प्रकार से रक्षा की जाय। वे हिन्दू तथा गाय और ब्राह्मणों के सेवक थे। शिवाजी बुद्धिमान, दूरदर्शी तथा साहसी थे। सन् 1680 ई ० में इस वीर मानव का स्वर्गवास हो गया।

आज शिवाजी इस संसार में नहीं हैं किन्तु उनका आदर्श हमारे सामने है। शिवाजी ने केवल मरहठों को ही एकत्रित नहीं किया किन्तु उन्होंने एक हिन्दू राष्ट्र का निर्माण किया। धार्मिक भावना और वीरता का इस महान पुरुष में एक अद्भुत सम्मिश्रण था। प्रत्येक भारतीय शिवाजी (shivaji mharaj) के नाम पर गर्व करता। सम्पूर्ण हिन्दू जनता इस राष्ट्र – निर्माता की सदैव आभारी रहेगी ।

कौन है यासीन मलिक?

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Conclusion

आज हम सब यह जाना कि शिवाजी महाराज एक संघर्ष शील बुद्धिमान, दूरदर्शी तथा साहसी राजा थे। हिंदू समुदाय के लोगों के लिए राष्ट्र निर्माण को लेकर बहुत किए। अपनी सम्पूर्ण क़ीमती जीवन की क़ीमती समय मे राष्ट्र निमार्ण में लगाए। और भी इस तरह की वीर सपूतों की आर्टिकल या जीवन से जुड़ी सुलझे और अनसुलझे जानकारी पाना चाहते हैं तो हमारे साइट को फ्लो करे। एक से बढ़कर एक जानकारी आपके लिए लाते रहते हैं ताकि आप रहे हर समय अपडेट 

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