उपभोक्ता के आर्थिक क्रिया क्या है? What is the economic action of the consumer.

उपभोक्ता के आर्थिक क्रिया क्या है? What is the economic action of the consumer in Hindi 
आइए जानते हैं कि उपभोक्ता Consumer आर्थिक क्रिया क्या है? 

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जीवन यापन करने के लिए मानव को कुछ आर्थिक क्रियाएं करना पड़ता है,क्यू की इस आर्थिक क्रिया पर ही मानव जिवन का अस्तित्व एवं विकास निर्भर करती है। आर्थिक क्रिया के अंतर्गत व्यक्ती अपने सीमित साधनो से असीमित आवश्यकताओं की पूर्ति करता है ।

Table of Contents

आर्थिक क्रिया मे चयन की समस्या problem of choice making आर्थिक समस्या क्या है?

आर्थिक साधनो की सीमितता के कारण किन आवश्यकताओं को जरूरत के हिसाब से, किस सीमा तक रखा जाए। इसके लिए चुनाव करना आवश्यक हो जाता है। इन्हीं कारण को आर्थिक समस्या कहा जाता है। 

एक आर्थिक समस्या उस समय उत्पन होती है जब सीमित साधन मे वैकल्पिक साधनो के सन्तुष्टि के लिए प्रयोग किए जाते हैं। 

असीमित आवश्यकताएं क्या होता है?what are unlimited needs in Hindi

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मनुष्य की आवश्यकताएं असीमित होती है। मानव के जन्म लेते ही आवश्यकताओं का जन्म हो जाता है और यह क्रम मानव के मृत्यु तक चलता रहता है। व्यक्ती अपने जीवन में एक आवश्कता की पूर्ति करता है, तो दूसरी आवश्यकता उत्पन हो जाती है।

और फिर दूसरी अवश्यकता पूर्ति करता है तो तीसरी खड़ी हो जाती है। यह क्रम व्यक्ती के जीवन में निरंतर चलता रहता है।  मानव जीवन में आवश्यकताओं की पूर्ति सम्भव नहीं होता है इसी कारक को असीमित आवश्यकताएं बोला जाता है।

आवश्यकताओं की महत्वपूर्णता क्या होता है? 

प्रत्येक मनुष्य के समकक्ष अनेक आवश्यकताएं होतीं हैं किन्तु जरूरत के हिसाब से महत्व अलग अलग होता है, कुछ आवश्यकताएं अधिक महत्वपूर्ण होती हैं तो कुछ कम होती हैं।

 

उपभोक्ता अर्थशास्त्र की परिभाषा Upbhokta Arthshastra ki paribhasha .Definition of consumer economic

साधनो की सीमितता यानी limited resources क्या है?

प्रत्येक मनुष्य के पास आवश्यकताओं के पूरा करने के साधन Means सीमित होते हैं ।यदि साधन सीमित न होते तो कोई आर्थीक समस्या उत्पन नहीं होती। समान्य बात यह है कि साधनो की पूर्ति के लिए व्यक्ती की आय वेतन, मजदूरी, या अन्य स्रोतो से होता है। जिसे वह आवश्यकताओं की पूर्ति करने के लिए प्रयोग करता है। 

मानव के साधन आवश्यकताओं की तुलना में सिमित होते हैं। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति के समक्ष आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु सीमित साधनो के उचित प्रयोग की समस्या उत्पन्न होती है। वह किन आवश्यकताओं की पूर्ति करे ये समस्या प्रत्येक क्षण मौजूद रहती है। यही ‘चयन की समस्या’ या आर्थिक समस्या है।

उपभोक्ता के लिए चयन की स्वतंत्रता Freedom of the choice to the consumer या
बजार मे उपभोक्ता की भूमिका क्या होती है Role of the consumer in market system

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किसी भी आवश्यकताओं की चयन की समस्या के सन्दर्भ में एक प्रश्न हर वक़्त उठता है कि क्या उपभोक्ता चयन के लिए पूर्ण स्वतन्त्र है? अर्थात क्या उपभोक्ता अपनी इच्छानुसार आय को व्यय करने और आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए स्वतन्त्र है या नहीं? या बाजार मे उपभोक्ता consumer की क्या भूमिका हैं? क्या बाजार और उत्पादन प्रणाली उपभोक्ता की इक्षा के अनुसार संचालित होती है? ईन सारे सवालों पर अर्थशास्त्रियों के दो मत रहें हैं।

एक मत के अनुसार उपभोक्ता को आय को व्यय करने की एवं वस्तुओ की ख़रीदने या चुनने की पूर्ण स्वतंत्रता है। इसमे किसी भी बाहरी शक्ति power की हस्ताक्षेप नहीं है। इसी आधार पर उपभोक्ता को बाजार market का सम्राट कहा जाता है।

पूँजीवादी अर्थव्यवस्था क्या होती है?What are capitalist economies? In Hindi

पूँजीवाद अर्थव्यवस्था मुक्त अर्थव्यवस्था होती है, इसमे उत्पादक पर किसी भी प्रकार की सरकारी नियंत्रण स्वीकार नहीं किया जाता है। एक समान बनाने वाला व्यक्ती, उद्यमी, व्यापारी को अपना लाभ ज्यादा करने का पूर्ण अधिकार होता है। इसी लिए उसे उपभोक्ता यानी Consumer’s को  ध्यान में रखते हुए रुचि, इच्छा, फ़ैशन, और पसंद योग्य प्रोडक्ट पर ध्यान देना पड़ता है।

जब उत्पादन का निर्णय लेना पड़ता है तो Consumer को ध्यान में रखते हुए उनके योग्य और पसंद को ध्यान में रख कर उत्पादन करना पड़ता है। तभी उसके उत्पादन की बजार में मांग होती हैं। उपभोक्ता किसी प्रकार के समान पर अपना प्रश्न चिन्ह लगा सकता है। यह अधिकार केवल उपभोक्ता के पास हैं उत्पादक और विक्रेता के पास नहीं रहता है।

उपभोक्ता की संप्रभुता की सीमाएँ कितने और कौन कौन सी है आइए जानते हैं Limitations of Consumer’s sovereignty
उत्पादन के चयन को प्रभावित करने वाला तत्व कौन कौन सा है? Factor’s that affect Consumer’s choice in Hindi

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उपभोक्ता की सीमाएं या चयन प्रभावित करने वाला तत्व बहुत सारे है, जिससे उपभोक्ता Consumer को उत्पादन को चयन करने में परेशानियाँ होती है।

उपभोक्ता की चयन शक्ति या खरीदने की स्वतंत्रता रीति-रिवाजों, सामाजिक दबावों, पास पड़ोस, आदि के अनुसार उपभोक्ता के चयन शक्ति को प्रभावित करता है।

उपभोक्ता अर्थशास्त्र क्या है? Upbhogta Arthshastra kya hai (what is Consumer’s economic)

उपभोक्ता की चयन प्रक्रिया को प्रभावित करने वाले कारक

1 आय का आकार Size of income

2 आदतों तथा सामाजिक परंपराएं Habits and social customs

3 विक्रय कलाएं Marketing methods
✔️ विज्ञापन Advertisements
✔️ पैकिंग Packing
✔️ उधार की सुविधाएं credit facilities
✔️ निर्मूल उपहार free facilities

4 तकनीकी ज्ञान एवं वस्तुओ की उपलब्धता technical knowledge and the availability of goods

5 आस-पास का परिवेश एवं प्रदर्शन प्रभाव Environment and demonstration effect

6 एकाधिकारी स्थितियाँ conditions of monopoly

7 प्रमाणित वास्तु का उत्पादन production of standardized goods

8 उपभोक्ता consumer की अज्ञानता एवं सुभाव Ignorance and nature of consumer

9 सरकारी नियंत्रण govermet control

▫️उपभोक्ता के आर्थिक क्रिया क्या है? 

▫️आर्थिक क्रिया क्या होता है? 

▫️आर्थिक क्रिया कौन कौन से है? 

▫️आर्थिक क्रिया कितने प्रकार के होते हैं? 

▫️आर्थिक डाटा क्या है? 

परिवारिक बजट का अर्थ एवं परिभाषा Meaning and definition of family budget

ईन सारी कारकों से उपभोक्ता को चयन प्रक्रिया में बहुत दिक्कतें होती है, आइये अब हम ईन सारी कारकों को डिटेल से समझते है। 

1 आय का आकार (Size of income) किसी भी व्यक्ति यानी उपभोक्ता Consumer के पास सीमित आय के कारण चयन करने का क्षेत्र बहुत कम हो जाता है। उपभोक्ता Consumer कौन सी वास्तु कितनी मात्रा में क्रय करेगा, यह उसकी आय पर निर्भर करता है। 

2 आदतों तथा सामाजिक परंपराएं (Habits and social customs) एक समान्य उपभोक्ता consumer, प्रचालित रीति रिवाज, फैशन, परम्परा का विरोध करने या उसके विपरित व्यवहार करने का साहस नहीं कर सकता।

उदाहरणा के लिए कोई जैन धर्मावलम्बी अपने समाज में मांस मदिरा आदि का सेवन नहीं कर सकता। हिन्दू परिवार में दिपावली पर दीपक जलाना या प्रकाश करना एक परंपरा है और सामान्यत: कोई विपरित आचरण नहीं करता। 

3 विक्रय कलाएं (Marketing methods) वर्तमान समय में उत्पादक एवं विक्रेता अपने उत्पादन की बिक्री हेतू अनेक उपाय एवं तकनीकें प्रयोग मे लाते हैं ईन उपायों के फल स्वरुप उपभोक्ता Consumer का व्यहवार बदलता है। इनमे कुछ इस प्रकार है 

✔️ विज्ञापन (Advertisements) से प्रचार विज्ञापन आधुनिक विक्रय प्रणाली का सर्वाधिक प्रभावी उपाय बनकर प्रकटन हुआ है। टी.वी, रेडियो, समाचार पत्र, और बहुत सारी सोशल नेटवर्क आदि के माध्यम करके उत्पादक उपभोक्ता के मानसिक को इस प्रकार प्रभावित करते हैं कि वह विज्ञापन वालेे वस्तु के चयन के लिए विवश हो जाता है। 

✔️ पैकिंग (packing) वर्तमान समय में उत्पादक आकर्षक एवं मनमोहक पैकिंग द्वारा उपभोक्ता Consumer को अपनी ओर आकर्षित करता है। सुन्दर पैकिंग के माध्यम से उपभोक्ता की चयन स्वतन्त्रता freedom choice प्रभावित होती है। 

✔️ उधार की सुविधाएँ (credit facilities) आजकल हर व्यक्ति आय से अधिक क्रय करना चाहता है। उत्पादन इस प्रवृति का लाभ उठाकर उपभोक्ता Consumer को उधार वस्तु देने या किस्तों पर पैसा जमा करने की दुविधा प्रदान कर उपभोक्ता Consumer की चयन स्वतन्त्रता को प्रभावित करने मे सफल हो जब जाते हैं 

✔️ उपहार की वस्तु (free facilities) विगत 4 – 6 से वर्षो से मुफ्त उपहार वस्तु देने की तकलीफ उत्पादकों मे काफी लोकप्रिय हुईं है। आज कल मार्केट में बहुत सारे free के वस्तुए मिल रही है जिससे उपभोक्ता Consumer को उनकी पसंद प्रभावित होता। उदाहरण के लिए टूथपेस्ट के साथ एक ब्रश free यह बात दुकानदार उपभोक्ता को बताता है तो,  उपभोक्ता का ध्यान बदल कर सबसे पहले फ्री वाले प्रोडक्ट के तरफ आएगा। जिससे Consumer’s को अपने हिसाब से प्रोडक्ट चयन करने में दिक्कत होगा। 

4 तकनीकी ज्ञान एवं वस्तुओ की उपलब्धता (Technical knowledge and the availability of goods) उत्पादन ग्यान तकनीकी और कौशल पर निर्भर करता है। यदि किसी देश मे तकनीकी पिछड़ी है और उत्पादक उस वास्तु का उत्पादन नहीं कर सकते। जिससे उपभोक्ता( Consumer) अपनी पसंद के अनुसार चयन नहीं कर सकता है। 

5 आस-पास का परिवेश एवं प्रदर्शन प्रभाव (Environment and demonstrations effect) प्रत्येक व्यक्ती मे आत्म प्रदर्शन करने की प्रवृति होती है और वह पास पड़ोस की तुलना में अपने को सर्व श्रेष्ठ सिद्ध करना चाहत है। इससे अस्पष्ट होता है कि उपभोक्ता Consumer कहा व्यावहार स्वतंत्रत एवं विवेकपूर्ण न होकर प्रदर्शन भावना से प्रभावित होता है। 

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